6 अक्टूबर 2019 - 13:25
आयत क्या कहती है? इस्लाम ठोस बुनियादों पर भी आधारित है और मनुष्य के सभी व्यक्तिगत व सार्वजनिक हितों को भी पूरा करता है।

ईमान वालों की राह काफ़िरों व पथभ्रष्ट लोगों से अलग हो जाएगी और हर कोई अपनी दिशा में जाएगा।

सूरए रूम की आयत क्रमांक 43 का अनुवादः

तो तुम (पूरे अस्तित्व के साथ) सीधे व ठोस धर्म की ओर उन्मुख हो जाओ, इससे पहले कि वह दिन आ जाए जिसके लिए ईश्वर की ओर से कोई वापसी नहीं है। उस दिन लोग अलग-अलग और गुट-गुट हो जाएँगे।

 

संक्षिप्त टिप्पणी:

यदि मनुष्य यह जान ले कि संसार के जीवन में उसके पास बहुत थोड़ा समय है और वह अपनी सोच से कहीं पहले अंत तक पहुंच जाएगा तो वह प्रयास करेगा कि इस समय से अधिक से अधिक लाभ उठाए ताकि कम से कम पछताना पड़े।

 

इस आयत से मिलने वाले पाठ:

  1. धर्म व उसकी शिक्षाओं पर ध्यान पर गंभीर और व्यापक रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए और इसे कोई आंशिक व सामयिक काम नहीं समझना चाहिए।
  2. जो चीज़ नैतिक व सामाजिक बुराइयों से समाज की मुक्ति का कारण बनती है वह धार्मिक शिक्षाओं पर भरपूर ध्यान है।